संकटमोचन हनुमान अष्टक
बाल्यकाल में सूर्य को निगल लेने से तीनों लोक अंधकारमय हो गए; देवताओं की प्रार्थना पर आपने सूर्य को छोड़ दिया और संकटमोचन कहलाए।
बाली के भय से सुग्रीव पर्वत पर रहते थे; हनुमान जी ने ब्राह्मण रूप में आकर श्रीराम से मिलाया और सुग्रीव का शोक दूर किया।
सीता जी की खोज में वानर दल समुद्र तट पर थक गया; हनुमान जी ने सीता का समाचार लाकर सबके प्राण बचाए।
रावण से पीड़ित सीता जी को हनुमान जी ने राम की मुद्रिका देकर आश्वस्त किया और राक्षसों का नाश किया।
लक्ष्मण के घायल होने पर हनुमान जी वैद्य सुषेण और द्रोण पर्वत लाए तथा संजीवनी देकर उनके प्राण बचाए।
रावण के नागपाश से राम सहित पूरा दल बँध गया; हनुमान जी गरुड़ को लाकर सबका बंधन और भय दूर करते हैं।
अहिरावण राम-लक्ष्मण को पाताल ले गया; हनुमान जी ने वहाँ पहुँचकर उसका और उसकी सेना का संहार किया।
हनुमान जी ने देवताओं के बड़े-बड़े कार्य किए हैं; भक्त विश्वास करता है कि वे उसका भी हर संकट शीघ्र दूर कर सकते हैं।
लाल आभा वाले, लाल लंगूरधारी, वज्र जैसी देह और दानवों का नाश करने वाले वीर कपि हनुमान की जय हो।