हनुमान बिदाई
सुन्दरकाण्ड के समापन पर हनुमान जी से विदा स्वीकार करने की प्रार्थना है।
प्रार्थना है कि इतना ही मिले जिसमें परिवार का पालन हो और कोई साधु भी भूखा न लौटे।
लोग दुःख में ईश्वर को याद करते हैं; सुख में भी स्मरण करें तो दुःख का भय नहीं रहता।
मिट्टी कुम्हार को याद दिलाती है कि समय आने पर शरीर भी मिट्टी में मिल जाएगा; इसलिए अहंकार नहीं करना चाहिए।
कथा पूर्ण होने पर हनुमान जी को विदा किया जाता है और श्रीराम, लक्ष्मण तथा जानकी से सदा कल्याण की प्रार्थना की जाती है।