हनुमानजी आवाहन
हे हनुमान जी, कथा-स्थल पर पधारिए। आप श्रीराम के सेवक हैं और मैं आपके चरणों का दास हूँ।
तुलसीदास रचित रामकथा का सार कहने के लिए पवनकुमार को हृदय में विराजने और मेरी विनम्र नमस्कार-भेंट स्वीकार करने का निवेदन है।
॥ श्री राम जय राम जय जय राम ॥
हे हनुमान जी, कथा-स्थल पर पधारिए। आप श्रीराम के सेवक हैं और मैं आपके चरणों का दास हूँ।
तुलसीदास रचित रामकथा का सार कहने के लिए पवनकुमार को हृदय में विराजने और मेरी विनम्र नमस्कार-भेंट स्वीकार करने का निवेदन है।
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